Skip to main content

मेरा वक़्त आना है बाकी

गुज़रा कल मुझे ना समझो,
मेरा वक़्त आना है बाकी,
'आज' मैंने अपनी रातों को सूरज किया है
आने वाला तुम्हारा 'कल' भी मेरा होगा
मेरी घड़ी की मरम्मत है थोड़ी बाकी।
बुझी राख मुझे ना समझो
कुछ चिंगारी है बाकी,
शहर तुम्हारा भी, होगा रोशन, मेरे ही औज़ से,
अधूरे ख्वाबो की, धधकती ज्वाला है बाकी।
आँख के पानी को बेबसी ना समझो,
इक बूंद छलका कर, हर घाव भर लेने की,
मेरी तैयारी!
सिर्फ अपना भविष्य नहीं बनाना मुझे,
इतिहास बनाने की कोशिशे जारी।
रखना समझा कर अपनी लहरों को .,
खुद को दरिया समझने वाले!
मैं सागर सी गहरी।
ना समझो इसे मेरा बचपना
हर लफ्ज़, हर सांस की ताकत का आईना,
लेकिन हूँ शांत अभी
गली-गली, कूचे-कूचे पर, 
अपना नाम उकेर देने की,
 
मैं कर रही तैयारी!!!

Comments

Post a Comment